एक ख़ुशी के तलास में थे हम कितने गम पास आ गए ........ जब ए सोचा तो घबरा गए आ गए कहा आ गए ,.......
यह सिर्फ एक गीत नहीं है यह जीवन की सचाई है । हम हर पल ख़ुशी तलासते है लेकिन वह हमारे हाथ में होने के बावजूद उसे हर जगह तलास करते है ।
एक आम इंसान कैसे अपनी रोजमर्रा की जिंदगी गुजरता है इस बात का एहसास बहुत आमिर लोगो को नहीं होता और जो अमीरो की परेशानिया होती वह आम लोगो को उसका एहसास नहीं होता है । एक आम नौकरी पेशा वाला रोज गिनता है की महीना में कितने दिन और बाकी है की पगार मिले ताकि घर का रासन ,किराया, बच्चों की फि तथा अन्य रोजमर्रा की वस्तुओ का आभाव न हो । वही एक आमिर आदमी जिसकी आमदनी लाखो करोडो में होती वह रोज गिनता है की महीने में कितने दिन गुजर चुके है अभी तक नुकासन हुआ या फायदा । लेकिन परेशानिया दोनों की एक सामान रहती है वह है अपने आप से संतुष्ट नहीं होना , और जब आप खुश नहीं होगे तो सुखी नहीं होगे ..।
एक कहानी सुनाता हु जब मैं इंजीन्यरिंग में पढ़ाई करता था तब एक मेरा दोस्त था उसके पिता देश के एक नामी कॉस्टमेटिक कंपनी के मालिक थे । उनके पोर्टिको में 21 गाड़िया और फूल ड्रेसअप ड्राइबर हर वक्त तैयार रहते थे । परिवार में कुल 4 लोग थे और घर पर नौकर स्टाफ ड्राइबर मिलाकर कुल 53 लोग काम करते थे । उस शहर की सबसे बड़ी हवेली उनकी थी । अकसर जाना आना रहता था मेरा । उनको अंकल बोलता था पत्नी को आंटी तथा बेटी को मैं दीदी बोलता था ।
अंकल शायद 30 दिन में 2 से 3 दिन घर रहते थे । आंटी को पार्टी और सामाजिक कार्यो से सुबह 8 बजे से रात के 10 बजे तक फुरसत नहीं । दीदी कब कहाँ जाती किसी को पता नहीं और मेरा दोस्त उसी शहर में होस्टल में रहता था जो मेरा ही रूम मेट था । बिना किसी पारिवारिक उत्सव का मैंने चारो को कभी नहीं देखा एक साथ । वैसे उसके घर जाना सप्ताह में 2 बार होता था ।
एक बार रविबार का दिन था मैं उसके घर गया दोपहर का वक्त था । ड्रॉइंग रूम में अंकल मिल गए । बहुत दिनों बाद मुलाकात हुई थी बात होने लगी । बात पढ़ाई लिखाई से शुरू होकर परिवार तक पहुची , वहाँ से चलते हुए सामाजिक बदलाव तक आ गई । अंकल बहुत ही शालीन मिर्दुभाषि और ज्ञान के साक्षात् मूर्ति थे । उस वक्त दुनिया के 16 देशो में उनका कारोबार था ।
जब बात समाज के बदलाव पर होने लगी तब उन्होंने एक बात बताई जो आज भी मुझे लगता है की सामने घटित हों रही है । कुछ देर पहले ही अमेरिका से आये थे और सोफे पर अकेले बैठे थे घर में , कोई नहीं था नौकरो को छोड़ कर । चाय नाश्ता नौकर ही दे रहे थे इसका एहसास मुझे तब हुआ जब दोनों के लिए चाय आया । मैंने पूछा अंकल आप अभी चाय ले रहे है तो बोले अभी तेरे आने से 10 मिनट पहले ही आया हु । चाय पिते हुए हम खामोश ही रहे क्योकि वह कम बोलते थे सिर्फ मैं उनका जबाब भर देता था । कुछ देर खामोशी के बाद बोले ,,,,,,,,
केशव तुझे पता है इंसान क्या सोचता है और उसे हकीकत में क्या चाहिए ? मेरे लिए यह सवाल बहुत कठिन था , मैंने बोला नहीं अंकल इस पर कभी सोचा नहीं । वह मुस्कुराये और बोले
जानता है जब इंसान के पास पैसे नहीं होते तो वह दो जून के खाने के लिए परेशान रहता है और पैदल चलता है। फिर जब कुछ पैसे आ जाते तो वह सोचता है की एक सायकल ले लू ताकि थोडा और तेजी से काम कर सकूँ , उसके बाद जब ऊपर बढ़ता है तो स्कूटर के लिए सोचता है । जब स्कूटर तक पहुच जाता है तो वह कार के लिए सपने देखता है कार हासिल कर लेने पर वह हवाई जहाज का खवाब रखता है । कुछ दिन बाद उसे वह भी हासिल कर लेता तब उसे पता चलता है की इसमें इकोनोमिक में नहीं एक्जकुटिव क्लास में सफ़र करू । जब उसके किस्मत में वह भी आ जाता और रोज उसको उसी में सफ़र करना पड़ता तब तुझे मालुम है वह क्या सोचता है ?
मैंने बोला नहीं अंकल कभी यह सोचा नहीं ....
बोले बेटा उसकी ख्वाइस होती पैदल चलने की ........लेकिन वह उसके किस्मत में नहीं होती । क्योकि हवाई जहाज के बाद तो हमारी सीमाये ख़त्म हो जाती है और फिर हम उस धरातल की तलास करते है जहॉ से सफ़र शुरू किये थे । कास वह दिन आता जब सिर्फ हमें दुनियादारी की नहीं एक ही चिंता होती दो रोटियों की ।
मेरे तो तलवे से जमीन सरक रही थी कभी इस बिन्दु पर सोचा ही नहीं था । क्युकी तब तो खाव्ब कुछ और थे सपने बहुत हशीन थे , जिंदगी की सबसे उच्ची चोटी छूने की चाहत थी .. लेकिन ...
फिर अंकल बोले बेटे जिंदगी में कभी उस उचाई को हासिल नहीं करना की जमींन पर पैर रखने को तरसते रहे । बेटे जिंदगी ऐसी होनी चाहिए की जो काम कर दिल से कर परिवार के साथ रह कर जिंदगी जीना । करोडो अरबो रूपये नहीं खाता है इंसान सिर्फ 30 रूपये की थाली से पेट भर जाता है । जो मजा उस जिंदगी में वह इस किले में नहीं है । दावा खा कर सोना पड़ता है कभी भी मेरी पूरी नींद विस्तर पर नहीं होती या तो कार में या हवाई जहाज में अब तो शकुन मिलेगा जब आखरी शास लूंगा तभी । बेटे यह जिंदगी का सच है ।
मुझे तो मानो काठ मार दिया हो मेरी जिंदगी की सोच जो थी उसके एक दम विपरीत था यह । मैं किसी फैसले के ऊपर नहीं पहुच पा रहा था । सोच रहा था क्या ऐसे ही इंसान की जिंदगी होती है । उनकी बाते मेरे मन मस्तिष्क को आज तक झंकृत करती है ।
जब इंजिनयरिंग के बाद पत्रकारिता में आया किताबो के शौक की वजह से और नौकरी के वजह से भी , इस दौरान हजारो लोगो से मुलाकाते होती है सबसे निचले पायदान से लेकर व्यापार - पद के सर्बोच्य स्थान को प्राप्त कर चुके लोगो से लेकिन कोई संतुष्ट नहीं मिलता । आज हर इंसान परेशान है और सबसे बड़ी बात की उसके बाद भी जिंदगी चलती ही है सबकी ।
सबसे अहम् है हम सुखी है या नहीं । सुखी कोन है जो खुश है और खुश कौन है यह पता नहीं चाहे कोई भी इंसान क्यों न हो ।
हमे अपनी ख़ुशी अपने में तलाशनी होगी और वह तभी पूरी होती जब हम संतुष्ट होते अपने आज से । आज हम संतुष्ट है तो कल खुश रहेगे और परसो सुखी रहेगे । अब संतुष्टि कहा होगी यह एक सवाल है । संतुष्टि आज में होती है , आज जो मैंने काम किया वह पूरी निष्ठां से किया अपने आप से सचाई किया अपने आप को झूठा नहीं बनया , अपना सम्पूर्ण योगदान दिया , इसके बाद जो आपको परिणाम मिलता वह आपकी सन्तुष्टी होती है , और आज आप संतुष्ट है तो कल निश्चित आपको ख़ुशी मिलेगी और आप भविष्य में सुखी रहेगे यह मेरी सोच है पता नहीं आप कितने इससे संतुष्ट होंगे । लेकिन सोचियेगा जरूर ,।।।।
दीपावली की हार्दिक शुभकामनाये
केशव ........10-11-2015

