Tuesday, 10 November 2015

एक ख़ुशी के तलास में.................


एक ख़ुशी के तलास में थे हम कितने गम पास आ गए ........ जब ए सोचा तो घबरा गए आ गए कहा आ गए ,....... 
यह सिर्फ एक गीत नहीं है यह जीवन की सचाई है । हम हर पल ख़ुशी तलासते है लेकिन वह हमारे हाथ में होने के बावजूद उसे हर जगह तलास करते है । 


एक आम इंसान कैसे अपनी रोजमर्रा की जिंदगी गुजरता है इस बात का एहसास बहुत आमिर लोगो को नहीं होता और जो अमीरो की परेशानिया होती वह आम लोगो को उसका एहसास नहीं होता है । एक आम नौकरी पेशा वाला रोज गिनता है की महीना में कितने दिन और बाकी है की पगार मिले ताकि घर का रासन ,किराया, बच्चों की फि तथा अन्य रोजमर्रा की वस्तुओ का आभाव न हो । वही एक आमिर आदमी जिसकी आमदनी लाखो करोडो में होती वह रोज गिनता है की महीने में कितने दिन गुजर चुके है अभी तक नुकासन हुआ या फायदा । लेकिन परेशानिया दोनों की एक सामान रहती है वह है अपने आप से संतुष्ट नहीं होना , और जब आप खुश नहीं होगे तो सुखी नहीं होगे ..। 


एक कहानी सुनाता हु जब मैं इंजीन्यरिंग में पढ़ाई करता था तब एक मेरा दोस्त था उसके पिता देश के एक नामी कॉस्टमेटिक कंपनी के मालिक थे । उनके पोर्टिको में 21 गाड़िया और फूल ड्रेसअप ड्राइबर हर वक्त तैयार रहते थे । परिवार में कुल 4 लोग थे और घर पर नौकर स्टाफ ड्राइबर मिलाकर कुल 53 लोग काम करते थे । उस शहर की सबसे बड़ी हवेली उनकी थी । अकसर जाना आना रहता था मेरा  । उनको अंकल बोलता था पत्नी को आंटी तथा बेटी को मैं दीदी बोलता था ।


अंकल शायद 30 दिन में 2 से 3 दिन घर रहते थे । आंटी को पार्टी और सामाजिक कार्यो से सुबह 8 बजे से रात के 10 बजे तक फुरसत नहीं । दीदी कब कहाँ जाती किसी को पता नहीं और मेरा दोस्त उसी शहर में होस्टल में रहता था जो मेरा ही रूम मेट था । बिना किसी पारिवारिक उत्सव का मैंने चारो को कभी नहीं देखा एक साथ । वैसे उसके घर जाना सप्ताह में 2 बार होता था । 
एक बार रविबार का दिन था मैं उसके घर गया दोपहर का वक्त था । ड्रॉइंग रूम में अंकल मिल गए । बहुत दिनों बाद मुलाकात हुई थी बात होने लगी । बात पढ़ाई लिखाई से शुरू होकर परिवार तक पहुची , वहाँ से चलते हुए सामाजिक बदलाव तक आ गई । अंकल बहुत ही शालीन मिर्दुभाषि और ज्ञान के साक्षात् मूर्ति थे । उस वक्त दुनिया के 16 देशो में उनका कारोबार था । 

जब बात समाज के बदलाव पर होने लगी तब उन्होंने एक बात बताई जो आज भी मुझे लगता है की सामने घटित हों रही है । कुछ देर पहले ही अमेरिका से आये थे और सोफे पर अकेले बैठे थे घर में , कोई नहीं था नौकरो को छोड़ कर । चाय नाश्ता नौकर ही दे रहे थे इसका एहसास मुझे तब हुआ जब दोनों के लिए चाय आया । मैंने पूछा अंकल आप अभी चाय ले रहे है तो बोले अभी तेरे आने से 10 मिनट पहले ही आया हु ।  चाय पिते हुए हम खामोश ही रहे क्योकि वह कम बोलते थे सिर्फ मैं उनका जबाब भर देता था । कुछ देर खामोशी के बाद बोले ,,,,,,,,


केशव तुझे पता है इंसान क्या सोचता है और उसे हकीकत में क्या चाहिए ? मेरे लिए यह सवाल बहुत कठिन था , मैंने बोला नहीं अंकल इस पर कभी सोचा नहीं । वह मुस्कुराये और बोले 


जानता है जब इंसान के पास पैसे नहीं होते तो वह दो जून के खाने के लिए परेशान रहता है और पैदल चलता है। फिर जब कुछ पैसे आ जाते तो वह सोचता है की एक सायकल ले लू ताकि थोडा और तेजी से काम कर सकूँ , उसके बाद जब ऊपर बढ़ता है तो स्कूटर के लिए सोचता है । जब स्कूटर तक पहुच जाता है तो वह कार के लिए सपने देखता है कार हासिल कर लेने पर वह हवाई जहाज का खवाब रखता है । कुछ दिन बाद उसे वह भी हासिल कर लेता तब उसे पता चलता है की इसमें इकोनोमिक में नहीं एक्जकुटिव क्लास में सफ़र करू । जब उसके किस्मत में वह भी आ जाता और रोज उसको उसी में सफ़र करना पड़ता तब तुझे मालुम है वह क्या सोचता है ?


मैंने बोला नहीं अंकल कभी यह सोचा नहीं ....


बोले बेटा उसकी ख्वाइस होती पैदल चलने की ........लेकिन वह उसके किस्मत में नहीं होती । क्योकि हवाई जहाज के बाद तो हमारी सीमाये ख़त्म हो जाती है और फिर हम उस धरातल की तलास करते है जहॉ से सफ़र शुरू किये थे । कास वह दिन आता जब सिर्फ हमें दुनियादारी की नहीं एक ही चिंता होती दो रोटियों की । 


मेरे तो तलवे से जमीन सरक रही थी कभी इस बिन्दु पर सोचा ही नहीं था । क्युकी तब तो खाव्ब कुछ और थे सपने बहुत हशीन थे , जिंदगी की सबसे उच्ची चोटी छूने की चाहत थी .. लेकिन ...


फिर अंकल बोले बेटे जिंदगी में कभी उस उचाई को हासिल नहीं करना की जमींन पर पैर रखने को तरसते रहे । बेटे जिंदगी ऐसी होनी चाहिए की जो काम कर दिल से कर परिवार के साथ रह कर जिंदगी जीना । करोडो अरबो रूपये नहीं खाता है इंसान सिर्फ 30 रूपये की थाली से पेट भर जाता है । जो मजा उस जिंदगी में वह इस किले में नहीं है । दावा खा कर सोना पड़ता है कभी भी मेरी पूरी नींद विस्तर पर नहीं होती या तो कार में या हवाई जहाज में अब तो शकुन मिलेगा जब आखरी शास लूंगा तभी । बेटे यह जिंदगी का सच है । 

मुझे तो मानो काठ मार दिया हो मेरी जिंदगी की सोच जो थी उसके एक दम विपरीत था यह । मैं किसी फैसले के ऊपर नहीं पहुच पा रहा था । सोच रहा था क्या ऐसे ही इंसान की जिंदगी होती है ।  उनकी बाते मेरे मन मस्तिष्क को आज तक झंकृत करती है । 


जब इंजिनयरिंग के बाद पत्रकारिता में आया किताबो के शौक की वजह से और नौकरी के वजह से भी , इस दौरान हजारो लोगो से मुलाकाते होती है सबसे निचले पायदान से लेकर व्यापार - पद के सर्बोच्य स्थान को प्राप्त कर चुके लोगो से लेकिन कोई संतुष्ट नहीं मिलता । आज हर इंसान परेशान है और सबसे बड़ी बात की उसके बाद भी जिंदगी चलती ही है सबकी । 

सबसे अहम् है हम सुखी है या नहीं । सुखी कोन है जो खुश है और खुश कौन है यह पता नहीं चाहे कोई भी इंसान क्यों न हो । 
हमे अपनी ख़ुशी अपने में तलाशनी होगी और वह तभी पूरी होती जब हम संतुष्ट होते अपने आज से । आज हम संतुष्ट है तो कल खुश रहेगे और परसो सुखी रहेगे । अब संतुष्टि कहा होगी यह एक सवाल है । संतुष्टि आज में होती है , आज जो मैंने काम किया वह पूरी निष्ठां से किया अपने आप से सचाई किया अपने आप को झूठा नहीं बनया , अपना सम्पूर्ण योगदान दिया , इसके बाद जो आपको परिणाम मिलता वह आपकी सन्तुष्टी होती है , और आज आप संतुष्ट है तो कल निश्चित आपको ख़ुशी मिलेगी और आप भविष्य में सुखी रहेगे यह मेरी सोच है पता नहीं आप कितने इससे संतुष्ट होंगे । लेकिन सोचियेगा जरूर ,।।।। 


दीपावली की हार्दिक शुभकामनाये
केशव ........10-11-2015 

Monday, 9 November 2015

प्रेम जिंदगी को सजाने के लिये है

प्रेम जिंदगी को सजाने के लिये है …………………

प्रेम जिंदगी का वह खुबसूरत अहसास है जिसे हर कोई महसूस करना चाहता हैं। एक ऐसा पवित्र जज्बात जो हर रिश्ते की बुनियाद है। इस अहसास को अगर महसूस करो तो मानो जन्नत मिल जाती है, रब तक पहुंचने का यह सबसे आसान तरीका है। सच्चा प्रेम और रब दोनों ही बडी मुश्किल से मिलते हैं। प्रेम का रिश्ता बड़ा ही अटूट रिश्ता है,जो कुछ पल का नहीं जंम जंमातर का होता है। यह एक पल का नहीं एक साल का नहीं यह रिश्ता तो सदियों का होता है। प्रेम किसी से कभी भी हो सकता है। प्रेम के अनेक रुप होते है। मां का प्रेम भाई बहन का प्रेम दोस्तों का प्रेम। सबके लिए प्रेम की परिभाषा अलग अलग है।  लेकिन किसी ने प्रेम में सच्चे दोस्त को पाया तो किसी ने दोस्त में सच्चे प्रेम को पा लिया। अंत में जीत सच्चे प्रेम की ही होती है। किसी भी रिश्ते की बुनियाद प्रेम  और विश्वास होनी चाहिए नाकि किसी और बाहरी जज्बात से ,लेकिन आज के जमाने में प्रेम के रिश्तों में मिलावट होने लगी है। बस सिर्फ इस प्रेम के माध्यम से जिंदगी को एक नये रुप मे देखने और सजाने की जरुरत होती है। इसके लिये हमे प्रेम और प्यार के बिच के अंतर को समझना होगा । आम तौर पर लोग प्रेम और प्यार को एक ही समझते है , लेकिन दोनो के बिच बहुत गहरी खाई है । प्रेम बिना किसी मकसद का होता है तो प्यार मे स्वार्थ कि मात्रा पाई जाती है । खैर वह अलग विषय है कभी दुसरे बार इस पर चर्चा करेगे ।

कहते है प्रेम अंधा होता है, पागल होता है, दिवाना होता है, एक नशा है, एक खुशी है, वह जिंदगी है।  जहां प्रेम अपने को दूसरे की नज़र से देखने की एक दृष्टी है । प्रेम मे पाना नही होता वह तो एक त्याग है जैसे राधा ने भी किशन से प्रेम किया था, क्या उसने किशन को पाया? प्रेम का दूसरा नाम त्याग, इन्तजार बलिदान और विश्वास है। किशन अंत में रुक्मिणी के ही हुए। इसका यह मतलब नहीं हुआ कि राधा का प्रेम सच्चा नहीं था। आज भी लोग राधा किशन की जोडी को ही अमर मानते है और साथ में उन दोनों की ही पूजा करते है। क्योंकि राधा ने कभी किशन को पाने की कोशिश नहीं की। अगर आपका प्रेम सच्चा हो तो वह अमर हो जाता है। प्रेम बाटने और लुटाने का नाम है। राधा के जीवन का अर्थ किशन थे। मीरा जो किशन की दीवानी थी। लोगो की इतनी तोहमत लगाने के बाद भी उसके लबो पर सिर्फ नाम होता था तो भगवान श्री कृष्ण का। त्याग और बलिदान की मूरत बनी। अपना सारा जीवन व्यतित किया किशन के चरणों में। जहर का प्याला भी पिया हंसते हंसते। यही तो प्रेम था?

कभी इंसान प्रेम कि गहराई में जाकर देखता है शायद नहीं , हम इंसान जन्म से मृत्यु तक असंख्य लोगों / स्थान / वस्तु / जीव के संपर्क में आते है। कुछ से हमे विशेष स्नेह हो जाता है,कुछ बहुत अजीज मित्र बन जाते हैं कुछ आते और चले जाते है । जिनसे हमारा विशेष स्नेह बन जाता है वह क्यु बनता है ? क्योकी इन सभी में किसी खास के प्रति हमारा मन नि:स्वार्थ भाव से प्रेम करने लगता है। चाहे वह इंसान हो या कुछ और हम उसके लिये तडपते है बेचैन रहते है सिर्फ प्रेम बस किसी स्वार्थ कि कामना कि पुर्ती के लिये नही ।

जिंदगी में प्रेम से बड़कर कुछ भी नहीं हैं । आज जिंदगी कहाँ जा रही है किसी को भी सोचने की फुरसत नहीं है ।आज किसी को अपने लिए समय है ही नहीं बस भागदौड़ में ही लगा रहता है । पर जिंदगी काफी अनमोल है और इसमें बस प्रेम ही होना चाहिए । मुझे लगता है अगर दुनिया सब लोग बस एक दुसरे से प्रेम करें तो नफरत के लिए कोई जगह नहीं रहेगी । तभी यह समाज वापस से एक खुबसूरत संस्कारी और सुन्दर समाज कह लायेगा। जहा लोग प्रेम से बस प्रेम करेंगे और रिश्तों की इज्ज़त करेगे । तब एक नया जहां होगा 

मेरी बात

दोस्तों नमस्कार ,
बहुत दिनों से सोच रहा था की अपने दिल की बात लिखने के लिए एक ऐसा प्लेटफोर्म का उपयोग करू जहा आजादी हो , मै पत्रकारिता जगत से जुडा हु और खासकर राजनीति से तो अपनी व्यक्तिगत भावना को उस मंच से व्यक्त नहीं कर सकता . उसके बाद कई सोशल साईट पर हु लेकिन वहा भी मेरी बोटो को खबरों से जोड़ कर देखा जाने लगता है . चाहे फेशबुक हो टीवीटर हो , कही भी एक बात को व्यक्त करता हु तो उसको अन्य तरह से देखा जाने लगता है .
इसलिए इन सबसे दूर यहाँ आपके सामने आया हु ताकी खबरों की दुनिया से और यहाँ से कोई ताल मेल ना रहे . यहाँ सिर्फ मेरी व्यक्तिगत भावनाए है जिसको पूरी आजादी से व्यक्त कर रहा हु चाहे मेरा कोई भी पोस्ट हो उसको अन्यथा ना लिया करे आप ..

आपका
केशव